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अब वह समय आ गया है जब कुछ निश्चित घटनाओं अनिवार्य घटित होगी। पृथ्वी ग्रह पर कई हजार वर्षों के अंधकार और बर्बरता के बाद, एक तथाकथित 'सभ्यता' का उदय हुआ और स्वाभाविक रूप से, प्रौद्योगिकी का विकास हुआ - एक ऐसा विकास, जिसमें पिछले 150 वर्षों के दौरान तेजी आई। पृथ्वी पर इस स्तर की तकनीकी प्रगति हुए 14,500 वर्ष बीत चुके हैं। यह तकनीक, जो सच्चे ज्ञान की तुलना में कुछ भी नहीं है, फिर भी, इतनी उन्नत है कि निकट भविष्य में पृथ्वी पर मानव जाति के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।
1987 में, फ्रांसीसी खोजकर्ता श्री मिशेल डेस्मारक्वेट को एक यूएफओ में सवार होकर 10 दिवसीय यात्रा के लिए ग्रह थियाओउबा की यात्रा करने के लिए आमंत्रित किया गया था। घर लौटने के बाद, उन्होंने अपनी पुस्तक "थियाओउबा भविष्यवाणी: स्वर्णिम ग्रह" में अंतरतारकीय यात्रा का वर्णन किया। उनके विवरण के अनुसार, थियाओउबा में एक उन्नत शांतिपूर्ण सभ्यता है, जिसमें स्वच्छ वातावरण, उन्नत तकनीकें, और उच्च आध्यात्मिक उपलब्धि मौजूद है।मिशेल ने ग्रह की "डोकोस" नामक आवास संरचनाओं को देखकर आश्चर्य व्यक्त किया, जो पृथ्वी की संरचनाओं से पूरी तरह से भिन्न हैं।"ऐसा प्रतीत होता था कि इस ग्रह पर प्रत्येक इमारत का आकार अंडे जैसा था, जो अक्सर अपनी 'किनारों' पर लेटी होती थी, पर कभी-कभी सीधी भी होती थी, जैसा कि मैंने कहा है, नुकीला सिरा ऊपर की ओर होता था। ये 'ढांचे' हल्के सफेद रंग के थे और इनमें कोई खिड़कीयां या दरवाजे नहीं थे। [...]इन इमारतों में न तो दरवाजे हैं और न ही खिड़कियां, यह अपने आप में असाधारण बात है, लेकिन एक बार अंदर जाने पर, यह और भी अजीब था। जैसा कि मैंने पहले भी बताया है, कुल मिलाकर यही आभास हो रहा था कि हम अभी भी बाहर ही हैं। रंगों की अद्भुत सुंदरता हर जगह थी; हरियाली; पेड़ों की शाखाएँ ऊपर नीले-बैंगनी आकाश को चीरती हुई; तितलियाँ; फूलों... मुझे याद है एक पक्षी छत के ठीक बीच में आकर बैठ गया था, जिससे हम उनके पैरों के तलवे देख सकते थे। ऐसा लग रहा था मानो यह चमत्कारिक रूप से हवा में ही रुक गया हो - इसका प्रभाव सचमुच असाधारण था।"इससे भी अधिक उल्लेखनीय बात यह है कि यद्यपि "डोकोस" की दीवारें पारदर्शी होती हैं, फिर भी बाहर से कोई अंदर नहीं देख सकता है, और वे निवासियों को स्वतंत्र रूप से आने-जाने की अनुमति देते हैं।मिशेल को उस उड़ने वाले उपकरण को आजमाने का मौका मिला जिसका इस्तेमाल थियाओउबा में सभी लोग करते थे। यह उपकरण टारा और लिटिओलाक से मिलकर बना था। उन्होंने कहा, "टारा एक ऐसा उपकरण है जिसे बेल्ट की तरह पहना जाता है जब आप उड़ना चाहते हैं।" "लिटिओलाक, टारा के साथ मिलकर उड़ने का काम करता है, पर उन्हें हाथ में पकड़ा जाता है।" इन सरल उपकरणों की मदद से वे औसतन 300 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से और अपनी इच्छानुसार किसी भी ऊंचाई पर यात्रा कर सकते थे।मिशेल को उनके परामर्शदाता "थाओ" द्वारा थियाओउबा पर स्थित सात बुजुर्गों से मिलने और ज्ञान प्राप्त करने के लिए ले जाया गया, जो शानदार प्रकाश बिकीर्ण करते हैं। नेता ने उनसे उनकी यात्रा के उद्देश्य के बारे में बात की।"जैसा कि थाओ ने आपको पहले ही समझा दिया है, मिशेल, आपको हमारे ग्रह पर आने के लिए हमारे द्वारा चुना गया है, ताकि आप कुछ संदेशों की रिपोर्ट कर सकें और पृथ्वी पर लौटने पर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रबोधन प्रदान कर सकें।" अब वह समय आ गया है जब कुछ निश्चित घटनाओं अनिवार्य घटित होगी। पृथ्वी ग्रह पर कई हजार वर्षों के अंधकार और बर्बरता के बाद, एक तथाकथित 'सभ्यता' का उदय हुआ और स्वाभाविक रूप से, प्रौद्योगिकी का विकास हुआ - एक ऐसा विकास, जिसमें पिछले 150 वर्षों के दौरान तेजी आई।पृथ्वी पर इस स्तर की तकनीकी प्रगति हुए 14,500 वर्ष बीत चुके हैं। यह तकनीक, जो सच्चे ज्ञान की तुलना में कुछ भी नहीं है, फिर भी, इतनी उन्नत है कि निकट भविष्य में पृथ्वी पर मानव जाति के लिए हानिकारक साबित हो सकती है। हानिकारक, क्योंकि यह केवल भौतिक ज्ञान है, आध्यात्मिक ज्ञान नहीं। प्रौद्योगिकी को आध्यात्मिक विकास में सहायक होना चाहिए, न कि लोगों को भौतिकवादी दुनिया में और अधिक सीमित करना चाहिए, जैसा कि आपके ग्रह पर अभी हो रहा है।इससे भी कहीं अधिक, आपके लोग एक ही लक्ष्य के प्रति जुनूनी हैं - समृद्धि। उनका जीवन धन की खोज से जुड़ी हर चीज से संबंधित है; ईर्ष्या, जलन, अमीरों से नफरत और गरीबों के प्रति तिरस्कार। दूसरे शब्दों में कहें तो, आपकी तकनीक, जो 14,500 साल पहले पृथ्वी पर मौजूद तकनीक की तुलना में कुछ भी नहीं है, आपकी सभ्यता को पतन की ओर ले जा रही है और उन्हें नैतिक और आध्यात्मिक तबाही के और करीब धकेल रही है।दरअसल, 1987 में जब मिशेल को यह संदेश दिया गया था, तब से लेकर पिछले कुछ दशकों में हमारी आधुनिक में अभूतपूर्व प्रौद्योगिकियों प्रगति हुई है। हालांकि ये प्रौद्योगिकियां जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाती हैं, लेकिन इनका दुरुपयोग निगरानी बढ़ाने, नियंत्रण स्थापित करने और यहां तक कि अपराधों को बढ़ावा दे सकता है।जैसा कि थियाओउबा ग्रह के बुजुर्गों ने हमें चेतावनी दी थी, प्रौद्योगिकी के विकास, विशेष रूप से इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के उपयोग के साथ, हम खुद को तेजी से सीमित हुए पाते हैं। हमारे शब्दों और व्यवहारों को आसानी से ट्रैक, मॉनिटर, उसका अध्ययन और यहां तक कि हेरफेर करके इच्छुक पक्षों के लिए लाभ, शक्ति या प्रभाव को अधिकतम किया जा सकता है, जो अक्सर पर्दे के पीछे छिपे रहते हैं।क्या आपने कभी फेसबुक या इंस्टाग्राम पर डायरेक्ट मैसेज भेजा है? (हाँ।) दोस्तों या परिवार के सदस्यों के साथ फोटो अपलोड करने के बारे में क्या ख्याल है? (हाँ) क्या आपने घर से निकलने से पहले कभी अपने मौसम ऐप पर स्थानीय मौसम की जाँच की है? (हाँ) अगर मैं आपसे कहूँ कि वे दिखने में निर्दोष लगने वाले कृत्य एक दिन आपके खिलाफ इस्तेमाल किए जा सकते हैं, और हैकर्स द्वारा नहीं, बल्कि कानूनी तौर पर आपकी अपनी सरकार द्वारा। [...]एक लोक रक्षक के रूप में अपने 15 वर्षों के कार्यअवधि में, मैंने देखा है कि प्रत्येक तकनीकी प्रगति के साथ हमारे संवैधानिक संरक्षण कमजोर होते जा रहे हैं। लेकिन हमारा चौथा दोर्षशोधन लुप्त होने वाली स्याही से नहीं लिखा गया था, और इसे गायब नहीं होना चाहिए, न ही इस डिजिटल युग में अनुचित तलाशी और ज़ब्ती के खिलाफ हमारी सुरक्षा को गायब होना चाहिए।मैं एल्गोरिदम को समझना चाहता हूं। गूगल (यूट्यूब के साथ) हो या मेटा (फेसबुक के साथ), ये सभी कंपनियां जो सोशल प्लेटफॉर्म चलाती हैं, वे आखिर क्या चाहती हैं? वे चाहते हैं कि लोग उनकी सेवा पर अन्य किसी भी सेवा की तुलना में अधिक समय व्यतीत करें। इसलिए ध्यान ही मुख्य मापदंड है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह अच्छी तवज्जो है या बुरी तवज्जो। वे भावनाओं की परवाह नहीं करते है; उन्हें इस बात की परवाह नहीं है कि आप सोशल मीडिया पर अच्छा समय बिता रहे हैं और अच्छी सामग्री देख रहे हैं, या खराब सामग्री देख रहे हैं, आप बस सामग्री देख रहे हैं और अधिक समय बिता रहे हैं।तो अगर जो कुछ आपत्तिजनक कहता है, और मुझे वह आपत्तिजनक लगता है, और मैं उन्हें जवाब देकर या उन्हें आपत्तिजनक सामग्री के उदाहरण के रूप में आगे भेजकर उस पर अपनी प्रतिक्रिया देता हूं, तो एल्गोरिदम कहता है, "मुझे यह बहुत पसंद आया!"यह बहुत प्यारा है!पुलिस ने ब्रिटेन स्थित एक अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो अपराधियों को ऐसी सेवा प्रदान कर रहा था जिससे वे फर्जी टेक्स्ट संदेशों का उपयोग करके पीड़ितों से पैसे चुरा सकें, इस गिरोह के खिलाफ दुनिया भर में अब तक 37 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जिनमें से 24 ब्रिटेन में हैं। अनुमान है कि 70,000 लोग इन घोटालों का शिकार हो चुके हैं, जिनमें उन्होंने लैब होस्ट द्वारा होस्ट की गई वेबसाइट पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी डालते देखा था।इस मामले में पीड़ितो ज्यादातर 25 से 45 वर्ष की आयु के हैं। (फिर काफी युवा – डिजिटल युग के पैदाइशीयों।) दरअसल, जो लोग अपना पूरा जीवन ऑनलाइन बिताते हैं, जो शायद ऑनलाइन बैंकिंग करते हैं, ऑनलाइन खरीदारी करते हैं - उनके इस जाल में फंसने की संभावना अधिक होती है, क्योंकि इंटरनेट का उनका उपयोग बहुत व्यापक है।हाल के वर्षों में, जैसे-जैसे अधिक लोग एआई चैटबॉट का उपयोग एक उपकरण के रूप में करने लगे हैं, सही जानकारी और गलत जानकारी के बीच अंतर करना ज्यादातर मुश्किल होता जा रहा है।संज्ञानात्मक वैज्ञानिक और एआई शोधकर्ता गैरी मार्कस का कहना है कि ये सिस्टम अक्सर मनगढ़ंत बातें बनाते हैं। एआई की भाषा में, इसे मतिभ्रम कहा जाता है और इससे एआई द्वारा उत्पन्न दुष्प्रचार के लगातार विस्तार, राजनीतिक कल्पना के विस्फोटक अभियानों और वैकल्पिक इतिहास की लहरों का डर पैदा होता है। हमने देखा कि झूठ फैलाने के लिए चैटजीपीटी का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।आपने शायद सिंथेटिक मीडिया शब्द के बारे में कभी नहीं सुना होगा, जिसे आमतौर पर डीप फेक के रूप में जाना जाता है, लेकिन हमारी सेना, कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों ने निश्चित रूप से इसके बारे में सुना है। ये अति-यथार्थवादी वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग हैं जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डीप लर्निंग का उपयोग करके नकली सामग्री या डीप फेक बनाती हैं। अमेरिकी सरकार को इस बात की चिंता बढ़ती जा रही है कि इनका इस्तेमाल गलत सूचना फैलाने और अपराध करने के लिए किया जा सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि डीप फेक बनाने वालों के पास लोगों को कुछ भी कहने या करने के लिए मजबूर करने की शक्ति होती है, कम से कम हमारी स्क्रीन पर। अधिकांश अमेरिकियों को इस बात का अंदाजा नहीं है कि पिछले चार वर्षों में ही प्रौद्योगिकी कितनी आगे बढ़ गई है, या इसके साथ आने वाले खतरे, व्यवधान और अवसरो क्या हैं। वगैरह…थियाओउबा के बुजुर्गों ने हमें चेतावनी दी थी कि परिपक्व आध्यात्मिक विकास और भौतिक विकास को निर्देशित और संतुलित करने की जागरूकता के बिना, हमारी तकनीकी हमारी सभ्यता को नीचे खींच रही है, "और इसे नैतिक और आध्यात्मिक तबाही के और करीब धकेल रही है।" हम कैसे पलटकर वापस ऊपर जा सकते हैं? इसके लिए हम सभी को जागृत होने और इस बात के प्रति सचेत होने की आवश्यकता है कि हम अपना जीवन कैसे जीते हैं, हम क्या विकल्प चुनते हैं, हम कौन सी जानकारी ग्रहण करते हैं, हम क्या भोजन करते हैं और हमारे विचारों, वाणी और कार्यों के क्या परिणाम होते हैं। यह सुनने में जटिल लग सकता है, लेकिन अंततः यह सब थियाओउबा के बुजुर्गों के अनुसार एक सार्वभौमिक सिद्धांत को बनाए रखने पर आधारित है।“समाधान प्रेम पर निर्भर करता है – धन पर नहीं। इसके लिए आवश्यक है कि लोग घृणा, द्वेष, ईर्ष्या और जलन से ऊपर उठें, और प्रत्येक व्यक्ति, चाहे वह सड़क सफाईकर्मी हो या सामुदायिक नेता, अपने पड़ोसी को स्वयं से पहले रखे, और जिसे भी मदद की जरूरत हो, उनकी सहायता के लिए अपना हाथ बढ़ाए। "हर किसी को अपने पड़ोसी की मित्रता की शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से आवश्यकता होती है - न केवल आपके ग्रह पर, बल्कि सभी ग्रहों पर।"प्रेम ही एकमात्र समाधान है! यदि हम अपने सभी शब्दों और कार्यों को प्रेम के सिद्धांत के अनुरूप ढाल लें, तो हम उथल-पुथल भरी परिस्थितियों से निपट सकते हैं और उस नेक मार्ग पर वापस लौट सकते हैं जो ईश्वर की ओर ले जाता है। यही वह समाधान है जिसकी याद हमारे परम प्रिय सुप्रीम मास्टर चिंग हाई (वीगन) दशकों से हमें याद दिलाते आ रहे हैं।जब हम इस प्रेम को ब्रह्मांड के सभी अन्य प्राणियों तक विस्तारित करने में सक्षम होते हैं, जिनमें वे पशु-लोग भी शामिल हैं जो हमारे सह-निवासीयो हैं, तो हम स्वयं को भी विस्तारित करते हैं और आध्यात्मिक रूप से महान बन जाते हैं। पशु-जनों के साथ शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखना, और उनकी अब और हत्या न करना, हमें ईश्वरीय आशीर्वादों की प्रचुरता की ओर आकर्षित करेगा। और जब पूरी दुनिया पशु-जनो के प्रति ऐसी करुणा दिखाएगी, तो निश्चित रूप से हमारे ग्रह का वातावरण स्थिर हो जाएगा, और यहां तक कि शांति और प्रेम की भावनाओं से रिसता हुआ स्वर्ग जैसा बन जाएगा।प्यार सिर्फ हमारे होठों पर कोई शब्द नहीं है, प्यार हमारे भीतर की भावना अवश्य होनी है, और उन्हें कार्यों के माध्यम से प्रकट किया जाना चाहिए। हम पशु(-जनो) से प्रेम करें, हम वैजी (वीगन) बने जाएंगे। धरती से प्यार करें, हम पर्यावरण के अनुकूल बने जाएंगे। दुनिया से प्यार करें, ग्रह को बचाएंगे। [...]मुझे प्रेम की अभिव्यक्ति चाहिए, दुनिया के लिए सिर्फ 1% अधिक प्रेम, अपने बच्चों के लिए प्रेम, सभी प्रजातियों के लिए प्रेम, इतना कि हम जानवर(-लोगो) के मांस और उससे संबंधित निर्दयी उत्पादों के प्रति अपनी रुचि का बलिदान कर सकें। हमें प्रेम को व्यापक पैमाने पर प्रदर्शित करना होगा, न कि केवल अपने परिवार के सदस्यों के लिए रोमांटिक प्रेम के रूप में - हमें उस प्रेम को बनाए रखना चाहिए, क्योंकि हर प्रकार का प्रेम पवित्र होता है। हर प्रकार का प्रेम हमें, हमारे प्रियजनों और हमारे आस-पास की किसी भी चीज की रक्षा करने के लिए कुछ सुंदर सकारात्मक ऊर्जा उत्सर्जित करता है। इसलिए यदि हममें से प्रत्येक व्यक्ति अपने परिवेश में अधिक प्रेम प्रदान करें, उन्हें परिवार से थोड़ा आगे तक फैलाए, और पर्याप्त मात्रा में प्रेम प्रदान करे, तो वह हमारे अस्तित्व के लिए सबसे बड़े खतरे को पिघला देने के लिए आवश्यक 100% प्रेम शक्ति की पूर्ति कर देगा।जैसा कि फ्रांसीसी कहावत है, "लेस ब्यू एस्पिरिट्स से रेनकॉन्ट्रेंट" या "सुंदर दिमाग मिलते हैं," ग्रह पर प्रबुद्ध मास्टरों, थियाओउबा और सुप्रीम मास्टर चिंग हाई हमें बताते हैं कि प्रेम ही मानवता की वर्तमान समस्याओं का समाधान है। हमें उनके बुद्धिमान परामर्श पर अभी अवश्य अमल करना है, वापसी असंभव हो जाने का समय आ जाने से पहले।हम मिशेल डेस्मारक्वेट को पृथ्वी की आबादी के साथ अपनी असाधारण यात्रा साँझा करने और थियाओउबा से आकाशगंगाओं में महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाने के लिए धन्यवाद देते हैं।










